गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले के एक सरकारी स्कूल से बच्चों की सुरक्षा और स्कूल प्रबंधन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि कक्षा 5वीं की करीब 10 छात्राओं की पानी की बोतलों में उनके ही कुछ सहपाठियों ने पेशाब मिला दिया। छात्राओं को इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने बोतलों का पानी पी लिया। घटना की जानकारी होने के बाद छात्राएं रोते हुए स्कूल की प्राचार्य के पास पहुंचीं। आरोप है कि शिकायत सुनने के दौरान प्राचार्य ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय छात्राओं से कथित तौर पर कहा कि “मुंह खराब हो गया हो तो 10-10 वाली चॉकलेट खा लो।” इस कथित टिप्पणी के बाद मामला और गरमा गया।

रंगोली बनाते समय हुई घटना
बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह छात्राएं स्कूल परिसर में रंगोली बना रही थीं। इसी दौरान कुछ छात्रों ने कथित तौर पर उनकी पानी की बोतलों में पेशाब मिला दिया। छात्राओं ने अनजान होने के कारण उसी पानी को पी लिया। कुछ समय बाद जब उन्हें घटना की जानकारी हुई तो वे परेशान होकर स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचीं। छात्राओं ने बताया कि उनकी बोतलों के साथ यह हरकत की गई है और इसमें कुछ अन्य छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं।
परिजनों ने स्कूल में किया विरोध
घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्राओं के परिजन और ग्रामीण स्कूल पहुंच गए। मामले को लेकर आक्रोशित लोगों ने स्कूल में विरोध प्रदर्शन किया और तालाबंदी भी की। परिजनों ने कथित रूप से शामिल छात्रों के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच और कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की जानकारी मिलने पर आरोन एसडीएम मंजूषा खत्री ने संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार कृष्णकांत चौबे और बीईओ संतोष धाकड़ को मौके पर भेजकर स्थिति की जानकारी लेने और जांच के निर्देश दिए। अधिकारियों ने छात्राओं, उनके परिजनों और संबंधित छात्रों के बयान दर्ज किए। पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
कलेक्टर ने क्या कहा?
कलेक्टर के अनुसार एसडीएम आरोन के स्तर से स्कूलों में हुई घटनाओं की जांच कराई गई है। जांच में कुछ स्कूलों में बच्चों द्वारा शरारत किए जाने की बात सामने आई है। संबंधित बच्चों और उनके अभिभावकों को बुलाकर समझाइश दी गई है। प्राचार्यों और शिक्षकों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
अब उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- स्कूल में बच्चों की पानी की बोतलों तक ऐसी हरकत कैसे पहुंची?
- घटना के समय स्कूल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था कहां थी?
- छात्राओं की शिकायत पर तत्काल संवेदनशील कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- प्राचार्य की कथित टिप्पणी की भी जांच होगी या नहीं?
- क्या जांच के बाद जिम्मेदार छात्रों और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की पूरी सच्चाई क्या है और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है। सबसे अहम सवाल यही है कि स्कूल, जहां बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।














