डाक कांवड़, तेज डीजे, मॉडिफाइड वाहन और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी बनी चुनौती; हरिद्वार प्रशासन ने बढ़ती भीड़ और बदलते स्वरूप को देखते हुए राज्यों के बीच साझा नीति की जरूरत बताई।
हरिद्वार। उत्तर भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा इस बार भी करोड़ों श्रद्धालुओं को हरिद्वार लेकर पहुंची। महादेव के प्रति आस्था और गंगाजल लेने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ प्रशासन के सामने सफाई, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ गईं। इस बार महज 12 दिनों में करीब 4.80 करोड़ शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे।
कांवड़ यात्रा का पारंपरिक स्वरूप पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं, कंधे पर सजी कांवड़ और ‘बोल बम’ के जयघोष से जुड़ा रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यात्रा के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु डाक कांवड़ के जरिए कम समय में यात्रा पूरी करते हैं। इसके साथ ही बड़े कलश, भारी कांवड़, मॉडिफाइड वाहन और तेज आवाज वाले डीजे का इस्तेमाल भी बढ़ा है। यात्रा के दौरान कई जगहों पर यातायात नियमों की अनदेखी ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ाई। हाईवे और प्रमुख सड़कों के आसपास बड़ी संख्या में वाहन खड़े किए गए, जिससे कई स्थानों पर अस्थायी पार्किंग जैसी स्थिति बन गई। कुछ जगहों पर कांवड़ यात्रियों ने सड़क किनारे ही डेरा जमा लिया। बिना साइलेंसर वाली बाइक, मॉडिफाइड वाहन और बिना हेलमेट यात्रा करने वालों के मामले भी सामने आए। कई वाहनों पर क्षमता से अधिक लोग सवार दिखाई दिए। यात्रा के दौरान मामूली विवाद या टक्कर की स्थिति में भी कुछ जगहों पर लोगों के बीच विवाद बढ़ने की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा फ्लाईओवर से रस्सियां और तार नीचे लटकाने, बैरिकेडिंग तोड़ने और डिवाइडर पार करने जैसी गतिविधियों ने भी प्रशासन के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी कीं। करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी का असर हरिद्वार की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा। यात्रा के दौरान प्लास्टिक, पानी की बोतलें, खाद्य सामग्री की पैकेजिंग और अन्य कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ी। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार इस बार हरिद्वार शहर क्षेत्र में 7 हजार मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा हुआ। हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर भी सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक के बावजूद घाटों और यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक कचरा नजर आया। करोड़ों लोगों की आवाजाही के बीच सफाई व्यवस्था को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था के साथ पर्यावरण और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन अब कांवड़ यात्रा के बदलते स्वरूप को देखते हुए भविष्य के लिए नई रणनीति बनाने पर जोर दे रहा है। अधिकारियों का मानना है कि हरिद्वार में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए केवल स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत उन राज्यों के बीच भी समन्वय जरूरी है, जहां से बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचते हैं।
भविष्य की यात्राओं के लिए डाक कांवड़ वाहनों की संख्या, वाहनों में सवारियों की क्षमता, डीजे की ध्वनि सीमा, हेलमेट की अनिवार्यता, बिना साइलेंसर वाली बाइक पर कार्रवाई, पार्किंग व्यवस्था, निर्धारित रूट और वाहनों की गति सीमा जैसे मुद्दों पर साझा नीति बनाने की जरूरत बताई जा रही है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को हरिद्वार पहुंचने से पहले ही यात्रा से जुड़े नियमों और सुरक्षा निर्देशों की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है। कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए यात्रा को सुरक्षित, अनुशासित और स्वच्छ कैसे बनाया जाए। इस बार की यात्रा में सामने आए आंकड़े और व्यवस्थागत चुनौतियां आने वाले वर्षों के लिए बेहतर योजना और राज्यों के बीच समन्वय की जरूरत को साफ तौर पर सामने रखते हैं।














