सिंगरौली/देवसर। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से सड़क व्यवस्था की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आवागमन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। देवसर विकासखंड की ग्राम पंचायत करदा में बारिश के बाद सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई, जिसके चलते प्रसव के लिए अस्पताल जा रही एंबुलेंस बीच रास्ते में ही फंस गई।एंबुलेंस के कीचड़ में फंसने का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस सड़क से ग्रामीणों का रोजाना आवागमन होता है, बारिश के दौरान वही सड़क इतनी खराब हो जाती है कि सामान्य वाहन तो दूर, आपातकालीन एंबुलेंस तक का निकलना मुश्किल हो जाता है।
गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाते समय फंसी एंबुलेंस
बताया जा रहा है कि एंबुलेंस एक गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में कीचड़ के कारण वाहन फंस गया। एंबुलेंस को निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीण सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में इस मार्ग की स्थिति हर साल खराब हो जाती है। सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

PM ग्राम सड़क योजना की सड़क पर सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक, यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांव को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई है। लेकिन बारिश के बाद सामने आई स्थिति ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसके रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सवाल यह है कि यदि योजना के तहत बनाई गई सड़क बारिश में ही कीचड़ में बदल जाए और उस पर एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन भी फंस जाएं, तो आखिर सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
ग्रामीणों ने मांगी जांच और कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क का तत्काल निरीक्षण कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और जरूरत के मुताबिक मरम्मत या सुधार कार्य कराने की मांग की है।फिलहाल एंबुलेंस के फंसने की तस्वीरें सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को सामने ला रही हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर जिम्मेदारी तय करता है या बारिश खत्म होने के बाद मामला फिर कागजों में दबकर रह जाता है।क्योंकि सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं होती—कई बार अस्पताल तक पहुंचने का यही रास्ता किसी की जिंदगी और मौत के बीच का फर्क तय करता है।














