अंकिता भंडारी के माता-पिता ने नियुक्ति रोकने के लिए दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; दलित बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस को लिखा खुला पत्र
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। राहुल गांधी ने अपील की है कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने से रोका जाए। वहीं, अंकिता के माता-पिता ने भी नियुक्ति रोकने की मांग करते हुए केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में हुई इस घटना में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर अब तक सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार नहीं संभालना चाहिए। राहुल गांधी की इस मांग के बाद मामला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। हालांकि, गौतम को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि जांच या अदालत के निष्कर्षों से होना बाकी है।
अंकिता भंडारी के माता-पिता ने भी गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रोकने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। परिवार लंबे समय से इस मामले में पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग करता रहा है। उनकी मांग है कि जांच के दौरान किसी भी तरह का संदेह दूर किया जाए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मामले में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर भी विवाद और सवाल उठते रहे हैं। इसी पहलू की जांच कराने की मांग परिवार और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की ओर से समय-समय पर की जाती रही है।
इसी बीच दलित बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस के नाम एक खुला पत्र लिखकर पार्टी से अपने राजनीतिक आचरण में भी नैतिकता के समान मानदंड अपनाने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि नैतिकता का सवाल केवल राजनीतिक विरोधियों से जवाब मांगने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजनीतिक दलों को अपने व्यवहार में भी इसका पालन करना चाहिए। अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बीच अब केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर है।













