दसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के दलौदा-सीतामऊ मार्ग पर हाल ही में निर्मित सड़क अब अपनी गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। सड़क पर कुछ ही समय में दरारें आने के बाद विभाग द्वारा की जा रही मरम्मत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मरम्मत के तरीके को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस सड़क से लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क पर कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगीं। इसके बाद संबंधित विभाग ने इन दरारों की मरम्मत के लिए क्रैक सीलिंग (Crack Sealing) तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। इस प्रक्रिया के तहत विशेष सीलेंट (काले लिक्विड) से सड़क की दरारों को भरा जा रहा है, ताकि उनमें पानी न जाए और सड़क की आयु बढ़ाई जा सके। हालांकि, मरम्मत का तरीका देखने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इसे “सड़क पर टांके लगाने” से जोड़कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण हाल ही में हुआ था, तो इतनी जल्दी उसमें दरारें आना चिंता का विषय है। उनका सवाल है कि आखिर नई सड़क को इतनी जल्द मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई। वहीं, सड़क निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, क्रैक सीलिंग सड़क रखरखाव की एक मानक और स्वीकृत तकनीक है। इसका उपयोग छोटी दरारों को सील करने और उनमें पानी के प्रवेश को रोकने के लिए किया जाता है, जिससे सड़क की उम्र बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, नई सड़क पर इतनी जल्दी इस तकनीक का इस्तेमाल क्यों करना पड़ा, यह जांच का विषय हो सकता है।फिलहाल स्थानीय लोग सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या निर्माण में खामी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।














