रिपोर्ट: आदर्श पांडेय | पन्ना\भोपाल पन्ना का नाम सुनते ही ज़ेहन में क्या आता है? चमकते हुए हीरे, बड़े-बड़े राजनेता, और सोशल मीडिया पर वायरल होते वीआईपी चेहरे। यहां से कैबिनेट मंत्री निकलते हैं, और यहीं के संजय नगाइच जैसे नेता वेयरहाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष बनकर सुर्खियों में छाए रहते हैं। लेकिन, इन चमकती हुई राजनीतिक उपलब्धियों के ठीक नीचे एक ऐसा अंधेरा है, जहाँ इंसानियत हर दिन घुट-घुट कर जीने को मजबूर है।
तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। ज़रा इन दृश्यों को देखिए।
यह कोई दुर्गम पहाड़ी इलाका या किसी ट्रैकिंग का रास्ता नहीं है। यह मध्य प्रदेश के पन्ना ज़िले की पवई विधानसभा का ग्राम पंचायत भितरी मुटमुरू है। और यह जो कीचड़ और गहरे गड्ढों से सनी पगडंडी आप देख रहे हैं, वह इस गांव की मुख्य सड़क है। विकास के दावों की ज़मीनी हकीकत के बीच यहां की विधानसभा पवई से भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता प्रहलाद लोधी जी विधायक हैं। यह उनका लगातार दूसरा कार्यकाल है। लेकिन भितरी मुटमुरू की इस सड़क को देखकर एक सीधा सा सवाल मन में उठता है…. विधायक जी, क्या कभी आपकी गाड़ी के पहिये इस तरफ से भी गुज़रे हैं? ज़रा सोचिए, जिस कीचड़ से पैदल निकलना दूभर है, वहां से अगर कोई वीआईपी काफिला गुज़रे, तो विकास का असली स्वाद समझ आ जाए। इंसानी ज़िंदगी और रोज़मर्रा का संघर्ष इस गांव में एक बड़ी आबादी आदिवासी समाज की है। दिहाड़ी मज़दूरी और खेती किसानी करने वाले इन लोगों की ज़िंदगी वैसे ही आसान नहीं है, ऊपर से यह सड़क उनके संघर्ष को दोगुना कर देती है।



असलियत नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर जन सरोकार और विकास के बड़े-बड़े दावे रोज़ पोस्ट होते हैं। लेकिन असली जन सरोकार इस कीचड़ में धंसा हुआ है। जब बड़े पदों पर बैठे नेता और प्रशासन के अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर विकास का खाका खींच रहे होते हैं, तब भितरी मुटमुरू का एक आम नागरिक अपने बुनियादी हक…. एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहा होता है। भितरी मुटमुरू की यह बदहाली सिर्फ एक सड़क का खराब होना नहीं है, यह उस पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता है जो वोट लेने के बाद अपने ही लोगों को उनके हाल पर छोड़ देती है।अब देखना यह है कि क्या यह कीचड़ प्रशासन के चश्मे पर पड़े जाले को साफ कर पाएगा? या फिर पन्ना के ऐसे कई गांव हमेशा की तरह विकास के नक्शे में महज़ एक अनदेखा बिंदु बनकर रह जाएगा।














