कोलकाता। पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया है। यह फैसला नाम वापसी की अंतिम तारीख से ठीक एक दिन पहले हुआ। संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लेने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। हालांकि, उनके चुनावी मैदान से हटने की वजह को लेकर उनकी ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। मुलाकात और उसके बाद नाम वापसी के घटनाक्रम ने नंदीग्राम के चुनावी समीकरण को जरूर बदल दिया है।

नामांकन वापस, अब ममता गुट का उम्मीदवार नहीं
संचिता के नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस गुट का नंदीग्राम में कोई उम्मीदवार नहीं रह गया है। चुनाव आयोग ने हाल ही में ममता गुट को नया नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। इससे पहले ममता गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को अपना प्रत्याशी बनाया था। वह पूर्व प्राथमिक स्कूल शिक्षिका रही हैं और 2018 से 2023 तक पंचायत समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में नौकरी गंवाने के बाद वह राजनीतिक रूप से चर्चा में आई थीं।
BJP ने शुभेंदु अधिकारी के करीबी की मां को उतारा
नंदीग्राम से बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के करीबी रहे दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले की जांच CBI कर रही है। बीजेपी के उम्मीदवार घोषित करने के बाद नंदीग्राम का मुकाबला पहले से ही हाई-प्रोफाइल माना जा रहा था। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को मैदान में उतारा है। इस तरह ममता गुट के प्रत्याशी के हटने के बाद नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले का स्वरूप बदल गया है।
कभी ममता बनर्जी खुद लड़ने की चर्चा थी
नंदीग्राम का नाम ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक टक्कर से जुड़ा रहा है। इस उपचुनाव से पहले ऐसी चर्चाएं भी थीं कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन पार्टी ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। 13 सितंबर को उम्मीदवारों की घोषणा के साथ यह स्पष्ट हो गया था कि ममता खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगी। अब संचिता के नामांकन वापस लेने के बाद ममता गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है। ऐसे में 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले इस सीट पर विपक्षी दलों के बीच तालमेल और चुनावी समीकरण भी चर्चा में आ गए हैं। नंदीग्राम में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि नामांकन वापसी के बाद ममता गुट का अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बदले हुए समीकरण का चुनावी मुकाबले पर क्या असर पड़ता है।













