खंडवा जिला न्यायालय परिसर में बुधवार को एक ऐसा भावुक घटनाक्रम सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। 9 साल की एक मासूम बच्ची की अभिरक्षा को लेकर माता-पिता आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच बहस और खींचतान के बीच मासूम बच्ची फूट-फूटकर रोती रही। करीब आधे घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और अधिवक्ताओं की समझाइश से मामला शांत हुआ और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्ची को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया खंडवा जिला न्यायालय परिसर में बालिका की अभिरक्षा को लेकर दोनों पक्ष पहुंचे थे। इसी दौरान बच्ची को अपने साथ ले जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और माता-पिता के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान 9 वर्षीय मासूम लगातार रोती-बिलखती रही। अदालत परिसर में मौजूद लोगों ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विवाद कुछ देर तक जारी रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए बच्ची के भविष्य और हितों को सर्वोपरि रखने की बात कही गई। करीब आधे घंटे तक चले विवाद और बातचीत के बाद दोनों पक्ष शांत हुए, जिसके बाद न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 9 वर्षीय बालिका को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि पारिवारिक विवादों और कानूनी लड़ाइयों का सबसे बड़ा असर उन मासूम बच्चों पर पड़ता है, जिनकी कोई गलती नहीं होती। फिलहाल न्यायालय परिसर में हुए इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हो गया और बालिका को सुरक्षित उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। अधिवक्ताओं ने भी अपील की है कि पारिवारिक विवादों में बच्चों के हित और उनकी भावनाओं को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए, ताकि मासूमों को ऐसे मानसिक आघात का सामना न करना पड़े।














