Home » लपेटा MP » भागीरथपुरा कांड पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- रिपोर्ट के आधार पर तय हो जिम्मेदारी; परिवारों को मिले राहत

भागीरथपुरा कांड पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- रिपोर्ट के आधार पर तय हो जिम्मेदारी; परिवारों को मिले राहत

Share This Article

इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने न्यायिक जांच आयोग की सार्वजनिक हुई रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सिंघार ने मांग की कि रिपोर्ट में सामने आई प्रशासनिक और तकनीकी कमियों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और प्रभावित परिवारों को आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राहत दी जाए।

न्यायिक आयोग ने भागीरथपुरा मामले में 36 मौतों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। सार्वजनिक रिपोर्ट के अनुसार 22 मौतों को दूषित पेयजल से संभावित रूप से जुड़ा पाया गया। आयोग ने पूरे घटनाक्रम को किसी एक दिन या एक अधिकारी की चूक के बजाय लंबे समय से चली आ रही तकनीकी, प्रशासनिक और निगरानी संबंधी कमियों का नतीजा बताया है।

पेयजल और सीवर लाइन की प्लानिंग पर उठे सवाल

सिंघार ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की योजना, रखरखाव और निगरानी से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई स्थानों पर सीवर और पेयजल पाइपलाइन एक-दूसरे के बेहद करीब या क्रॉसिंग की स्थिति में थीं। पाइपलाइन में लीकेज और पानी की लाइन में नकारात्मक दबाव जैसी परिस्थितियों से सीवेज के पेयजल नेटवर्क में पहुंचने की संभावना बनी। रिपोर्ट में जल और सीवर नेटवर्क से जुड़े मूल तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने मूल प्लान और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की अनुपलब्धता की अलग से जांच की सिफारिश की है।

पाइपलाइन बदलने में देरी बनी बड़ा मुद्दा

भागीरथपुरा की पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में हुई देरी भी आयोग की रिपोर्ट में प्रमुख बिंदु है। रिपोर्ट के अनुसार एक परियोजना में टेंडर प्रक्रिया से काम पूरा होने तक 859 दिन लग गए। आयोग ने माना कि समय पर पाइपलाइन बदली जाती तो दूषित पानी की इस त्रासदी को टाला जा सकता था। सिंघार ने इसी देरी को लेकर सरकार और नगर निगम से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब समस्या को लेकर पहले से शिकायतें और तकनीकी चिंताएं मौजूद थीं, तो सुधार का काम समय पर क्यों नहीं हुआ।

फाइलों की देरी पर भी सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने संबंधित फाइलों की आवाजाही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि एक फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए लंबे समय तक लंबित रही। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने केवल फाइल लंबित रहने के आधार पर मेयर की व्यक्तिगत लापरवाही तय नहीं की है। आयोग की व्यापक टिप्पणी यह है कि भागीरथपुरा संकट लंबे समय में जमा हुई कई व्यवस्थागत कमियों का परिणाम था। रिपोर्ट में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था के रखरखाव, निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई तथा पाइपलाइन बदलने में हुई देरी जैसे पहलुओं पर जिम्मेदारी की बात सामने आई है।

6 फरवरी तक दूषित पानी की सप्लाई का रिकॉर्ड

जांच रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति 6 फरवरी 2026 तक जारी रहने के रिकॉर्ड मिले। पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया पाए गए थे। आयोग ने पानी की गुणवत्ता और पाइपलाइन व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं की जांच की।

प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की सिफारिश

आयोग ने मृतकों के परिवारों और गंभीर रूप से प्रभावित लोगों के लिए आर्थिक सहायता की सिफारिश भी की है। सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक मृतक के परिवार के लिए 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए 2 से 3 लाख रुपये की सहायता की सिफारिश सामने आई है। इसके साथ स्वास्थ्य व्यवस्था और जलापूर्ति तंत्र में दीर्घकालिक सुधारों की जरूरत बताई गई है।

जनप्रतिनिधियों को लेकर सिंघार के आरोप, आयोग की रिपोर्ट में अलग निष्कर्ष

सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का दबाव बनाया गया और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी से बचाने की कोशिश हुई। यह सिंघार का राजनीतिक आरोप है। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार न्यायिक आयोग ने जनप्रतिनिधियों को भागीरथपुरा त्रासदी के लिए जिम्मेदार नहीं माना। रिपोर्ट का फोकस मुख्य रूप से अधिकारियों की कथित लापरवाही, तकनीकी व्यवस्था की खामियों, निगरानी की कमी और पाइपलाइन बदलने में हुई देरी पर रहा है। अब इस रिपोर्ट के बाद बड़ा सवाल यह है कि आयोग की सिफारिशों पर सरकार क्या कार्रवाई करती है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलती है। साथ ही जल और सीवर नेटवर्क से जुड़ी वर्षों पुरानी कमियों को दूर करने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, इस पर भी नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

Live Poll

[democracy id="1"]

Also Read This