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मऊगंज में नल-जल योजना पर EOW का शिकंजा, करोड़ों के भुगतान के बावजूद अधूरे काम; टंकी ढही, कनेक्शन भी अधूरे

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मऊगंज। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत संचालित नल-जल योजनाओं को लेकर जांच में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। नईगढ़ी विकासखंड के अलग-अलग गांवों में पानी की टंकी, पाइपलाइन, पंप हाउस और घर-घर नल कनेक्शन जैसे काम कराए जाने थे। जांच में निर्धारित काम पूरा होने से पहले ही करीब 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने FIR दर्ज की है। मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जे.पी. द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पाण्डेय, उपयंत्री ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी को आरोपी बनाया गया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

बिना काम के 3 करोड़ 85 लाख का भुगतान! मऊगंज में नल जल योजना में भारी  भ्रष्टाचार, ठेकेदार-अधिकारियों पर गिरी गाज

पांच साल बाद भी कई गांवों में काम अधूरा

 जांच के मुताबिक नल-जल योजना के तहत निर्माण कार्य को करीब नौ महीने में पूरा किया जाना था। लेकिन आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कई गांवों में निर्माण अधूरा रहा और जल प्रदाय शुरू नहीं हो सका।खटखरी गांव में बनाई गई पानी की टंकी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। जांच में आरोप है कि पहली बार पानी भरने के दौरान ही नवनिर्मित टंकी ढह गई।

कहीं पाइपलाइन अधूरी, कहीं घरों में नल ही नहीं

 जांच में कई स्थानों पर योजना के दावों और मौके की स्थिति में अंतर सामने आने की बात कही गई है। कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने का काम गांव के बाहरी हिस्से तक ही सीमित मिला, जबकि घरों के भीतर नल फिटिंग और सर्कुलर स्टैंड पोस्ट का निर्माण नहीं पाया गया।करह उर्फ खैरागढ़ में पांच मोटर पंप लगाए जाने के बजाय सिर्फ एक सबमर्सिबल मोटर मिलने की बात जांच में सामने आई है। वहीं करीब 740 घरेलू कनेक्शन किए जाने के दावे के बावजूद घरों में नल फिटिंग नहीं मिलने का आरोप है।

शिवराजपुर और जुड़मनिया रघुनाथ में भी अधूरे निर्माण

जांच के अनुसार शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का काम अधूरा पाया गया। वहीं जुड़मनिया रघुनाथ में मुख्य पाइपलाइन भी पूरे गांव तक नहीं पहुंची थी। यानी कागजों पर योजना की प्रगति और जमीन पर मौजूद निर्माण को लेकर जांच एजेंसी के सामने कई सवाल खड़े हुए हैं।

भुगतान पर भी उठे सवाल

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर है। जांच में आरोप है कि निर्धारित निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही ठेकेदार को 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भुगतान कर दिया गया। अब EOW इस बात की पड़ताल कर रही है कि भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और अधूरे या कथित गुणवत्ताहीन काम के बावजूद भुगतान किस आधार पर किया गया।

EOW की FIR के बाद बढ़ा जांच का दायरा

FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसी निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया, मौके पर हुए वास्तविक काम और संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदार की भूमिका की जांच करेगी। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। आगे की विवेचना में यह स्पष्ट होगा कि योजना के क्रियान्वयन में किन स्तरों पर लापरवाही या अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मऊगंज की इस नल-जल योजना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक पानी पहुंचाना था, तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कई जगह निर्माण अधूरा क्यों रह गया? अब EOW की जांच से भुगतान और निर्माण के बीच की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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