पन्ना/अजयगढ़। विकास परियोजनाओं के बीच विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा एक बार फिर पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र में गरमा गया है। मझगाय और रूंझ बांध के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसान और आदिवासी परिवारों ने बढ़ते जलस्तर और मुआवजे को लेकर ‘चिता आंदोलन’ शुरू किया है। प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक चिताओं पर बैठकर और लेटकर अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि कई परिवारों के घर और जमीन डूब क्षेत्र की चपेट में आ रहे हैं, जबकि मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे अब भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। प्रदर्शन में ‘न्याय दो या मार दो’ और ‘न्याय नहीं तो बांध नहीं’ जैसे नारे भी लगाए जा रहे हैं।

₹12.50 लाख के पैकेज को लेकर सबसे बड़ा विवाद
पूरे विवाद के केंद्र में मुआवजा और पुनर्वास पैकेज है। जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश सरकार ने मझगाय और रूंझ परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.50 लाख प्रति पात्र परिवार करने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अगस्त में अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को स्वीकृत अतिरिक्त राशि का भुगतान जल्द कराने के निर्देश भी दिए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घोषणा के बावजूद पात्र परिवारों तक पूरी राशि नहीं पहुंची है। उनका कहना है कि जब पानी गांवों और घरों तक पहुंच रहा है, ऐसे में पुनर्वास और भुगतान की प्रक्रिया में देरी गंभीर समस्या बन रही है।
प्रशासन का दावा- पहले ही बांटे जा चुके ₹5 लाख
दूसरी ओर, प्रशासन का पक्ष आंदोलनकारियों के दावों से अलग है। प्रशासन के अनुसार रूंझ परियोजना से प्रभावित 670 और मझगाय परियोजना से प्रभावित 1,219, यानी कुल 1,889 परिवारों को पहले चरण में ₹5 लाख की राशि दी जा चुकी है। इसके बाद सरकार द्वारा स्वीकृत ₹12.50 लाख के पैकेज के तहत शेष राशि का भुगतान प्रक्रिया में है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने इन परिवारों के लिए अतिरिक्त ₹202.50 करोड़ के पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी थी। यानी विवाद इस बात पर है कि घोषित बढ़ी हुई सहायता का भुगतान पात्र परिवारों तक कितनी तेजी से और किस प्रक्रिया के तहत पहुंच रहा है।
ग्रामसभा, जमीन और मुआवजे को लेकर भी आरोप
आंदोलनकारी संगठन प्रशासन पर जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ग्रामसभा की सहमति, जमीन के मूल्यांकन और मुआवजे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। केन-बेतवा परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने भी बताया है कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया RFCTLARR Act, 2013 तथा मध्य प्रदेश सरकार के स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत की जा रही है।
बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता
मझगाय बांध क्षेत्र में हालिया बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ी है। स्थानीय रिपोर्टों में कुछ गांवों और बस्तियों के आसपास पानी बढ़ने तथा रास्तों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में विस्थापित परिवारों की मांग केवल मुआवजे तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित पुनर्वास और तत्काल बुनियादी सुविधाओं से भी जुड़ गई है।
विकास की रफ्तार और विस्थापितों के सवाल के बीच फंसा अजयगढ़
केन-बेतवा परियोजना को सरकार बुंदेलखंड के लिए सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा से जुड़ी बड़ी परियोजना के रूप में देख रही है। दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों का सवाल है कि विकास की कीमत चुकाने वाले लोगों के पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा पहले सुनिश्चित होनी चाहिए। फिलहाल अजयगढ़ में आंदोलनकारियों के दावे और प्रशासन के आंकड़े आमने-सामने हैं। एक ओर विस्थापित परिवार पानी बढ़ने के बीच तत्काल मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन भुगतान प्रक्रिया जारी होने और पूर्व में राशि वितरित किए जाने का दावा कर रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि ₹12.50 लाख के घोषित पैकेज का लाभ हर पात्र परिवार तक कब पहुंचेगा और बढ़ते पानी के बीच प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था कितनी जल्दी जमीन पर दिखाई देगी?













