सीहोर। जिले के ग्राम लसूड़िया खास में काहिरी बांध के पास स्थित पानी फिल्टर प्लांट में एक बार फिर क्लोरीन गैस के रिसाव से हड़कंप मच गया। रात में टैंक में लीकेज की सूचना के बाद गैस आसपास के इलाके में फैलने की बात सामने आई। इसके बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। गैस के संपर्क में आने की शिकायत के बाद कई लोगों ने आंखों में तेज जलन, घुटन, सांस लेने में परेशानी और उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं बताईं। प्रभावित लोगों को देर रात सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

8 से 10 मरीज अस्पताल पहुंचे
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता के मुताबिक, लसूड़िया खास से करीब 8 से 10 लोग उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। आपातकालीन कक्ष में मरीजों का प्राथमिक उपचार किया गया और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बताया गया कि प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह समेत कुछ लोगों को देर रात भर्ती किया गया। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि भर्ती मरीजों में से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अस्पताल पहुंची डॉक्टरों की टीम, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी पर सवाल
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित लोगों का इलाज शुरू किया। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के बाद प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल नहीं पहुंचा। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि गैस रिसाव की स्थिति गंभीर थी तो प्रशासनिक और संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके और अस्पताल दोनों जगह मौजूद रहना चाहिए था।
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प्रशासन के दावे और ग्रामीणों के आरोप आमने-सामने
घटना के बाद स्थिति को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति नियंत्रण में होने तथा लीकेज नहीं होने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर ग्रामीण और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फिल्टर प्लांट के आसपास गैस के प्रभाव से पेड़-पौधों के झुलसने के निशान दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि गैस के असर को मौके पर महसूस किया जा रहा है और लीकेज पूरी तरह खत्म होने के दावों से जमीनी स्थिति मेल नहीं खाती। हालांकि गैस रिसाव की वास्तविक स्थिति और उसके कारणों की पुष्टि संबंधित तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पानी शुद्धिकरण संयंत्र में क्लोरीन जैसी गैस के इस्तेमाल को देखते हुए ग्रामीण अब प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि टैंक में लीकेज की वजह से गैस आसपास के इलाकों तक पहुंची है तो यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा का मामला है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
तीनों सिलेंडर हटाए गए: CMO
नगर पालिका सीहोर के CMO सुधीर सिंह के मुताबिक, ग्रासिम कंपनी नागदा की टेक्निकल टीम को बुलाकर कार्रवाई की गई। उनके अनुसार तीनों सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक ट्रक में वापस ले जाकर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से हटा दिया गया है। अब सवाल यह है कि क्लोरीन गैस के रिसाव की स्थिति आखिर क्यों बनी, टैंक या सिलेंडर में लीकेज की वजह क्या थी और प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। इन सवालों के जवाब तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।













