धार। धार जिले के टांडा रोड रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रेन को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद अब इस पर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्रेन के उद्घाटन को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर इस परियोजना की आधारशिला पहले ही रखी जा चुकी थी, तो ट्रेन शुरू होने में 16 साल क्यों लग गए? उमंग सिंघार ने दावा किया कि जिस रेल परियोजना का अब उद्घाटन किया गया है, उसकी आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में रखी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्र की उपेक्षा क्यों की गई।

‘मोदी जी ने कौन सी नई ट्रेन दी?’
सिंघार ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “मोदी जी ने कौन सी नई ट्रेन दी? शिलान्यास तो मनमोहन सिंह जी ने किया था।” उन्होंने कहा कि 16 साल बाद ट्रेन का संचालन शुरू होना क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी खबर है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इतने वर्षों तक परियोजना के अटके रहने पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

’16 साल तक आदिवासी क्षेत्र की उपेक्षा क्यों?’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि धार का यह इलाका आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यहां रेल कनेक्टिविटी लोगों की जरूरत से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रेल सुविधा इतनी महत्वपूर्ण थी तो इसे शुरू करने में 16 साल का समय क्यों लगा। सिंघार ने इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि परियोजना के लंबे समय तक लंबित रहने के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
गुजरात जाने वाले मजदूरों और बड़ौदा जाने वाले मरीजों को फायदा
हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सिंघार ने ट्रेन शुरू होने के फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा कि रेल सेवा शुरू होने से आदिवासी क्षेत्र के लोगों को गुजरात में मजदूरी के लिए आने-जाने में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा बड़ौदा में इलाज कराने जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी आवागमन आसान होगा। सिंघार ने कहा कि इस सुविधा का स्वागत है, लेकिन सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इसे शुरू होने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा।
उद्घाटन के साथ शुरू हुआ श्रेय लेने का सियासी खेल?
ट्रेन के उद्घाटन के बाद अब मुद्दा सिर्फ रेल सेवा शुरू होने तक सीमित नहीं रहा। एक तरफ सरकार इसे क्षेत्र के लिए बड़ी कनेक्टिविटी उपलब्धि बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष परियोजना की पुरानी नींव का हवाला देकर सरकार से 16 साल की देरी का हिसाब मांग रहा है। ऐसे में सियासत का असली सवाल यही है—ट्रेन आज चली, लेकिन अगर इसकी नींव 16 साल पहले रखी गई थी, तो इतने लंबे इंतजार की वजह क्या रही?













