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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को मिला नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने ली शपथ

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भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को राजधानी भोपाल स्थित लोकभवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। जस्टिस कोगजे के शपथ लेने के साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। इससे पहले जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

नए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को शपथ दिलाते राज्यपाल मंगू भाई पटेल। - Dainik Bhaskar

हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस कोगजे

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को उनके नाम की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को लेकर अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में लंच कार्यक्रम आयोजित किया गया। जस्टिस कोगजे शुक्रवार से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए।

गुजरात से शुरू हुआ कानूनी सफर

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1990 में केमिस्ट्री में बीएससी और 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी वर्ष उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की। करीब 33 वर्षों के कानूनी अनुभव के बाद वे न्यायपालिका के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे। 6 अप्रैल 2016 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 15 मार्च 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने।

गोधरा दंगा मामलों में गुजरात सरकार की ओर से की पैरवी

जस्टिस कोगजे को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने 2001 में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में कार्य किया। वर्ष 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल बने। इसके बाद 2011 में उन्हें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल के रूप में जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने 2002 के गोधरा दंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में गुजरात सरकार की ओर से पैरवी की।

आपराधिक और औद्योगिक मामलों में अहम फैसले

गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में जस्टिस कोगजे ने आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस, लेबर और औद्योगिक विवादों से जुड़े मामलों की भी सुनवाई की। उनके कई फैसले चर्चित रहे हैं।

पत्नी की हत्या के आरोपी को जमानत से इनकार

2024 में गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी पति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस ए.वाई. कोगजे की पीठ ने आरोपी के जांच को गुमराह करने के प्रयास को गंभीरता से लिया था।

कस्टोडियल डेथ मामले में सख्त रुख

2022 में कस्टोडियल डेथ से जुड़े एक मामले में अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार किया था। मामले में हिरासत में लिए गए लोगों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोपों को अदालत ने संज्ञान में लिया था।

जल निकायों की सुरक्षा पर जोर

2024 में जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर जे. दवे की पीठ ने तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों की सुरक्षा को लेकर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने जल निकायों में अंधाधुंध लैंडफिलिंग के पर्यावरण और जलभराव पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

श्रमिक अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

2022 के एक मामले में अदालत ने औद्योगिक विवाद और वर्कमैन के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारी को केवल कॉन्ट्रैक्ट पर होने के आधार पर औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

2031 में होंगे सेवानिवृत्त

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल करीब चार वर्ष दस महीने का रहेगा। जस्टिस कोगजे ने गुजरात हाईकोर्ट में अपने विदाई समारोह के दौरान न्यायपालिका को अपना दूसरा घर बताया था और युवा अधिवक्ताओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट उनके नेतृत्व में न्यायिक कार्य आगे बढ़ाएगा।

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