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स्वच्छता के बाद स्वच्छ हवा में भी इंदौर का जलवा, देश में दूसरा स्थान; लखनऊ नंबर-1, जबलपुर तीसरे पायदान पर

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इंदौर। देश की स्वच्छता रैंकिंग में लगातार अपनी पहचान बनाने वाला इंदौर अब वायु गुणवत्ता सुधारने के मामले में भी देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो गया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में इंदौर ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस समारोह में शहर को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।इस रैंकिंग में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि मध्य प्रदेश का जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा। आधिकारिक परिणामों की घोषणा नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान की गई।

महापौर और निगम आयुक्त ने ग्रहण किया सम्मान

नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में इंदौर की ओर से महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और स्वच्छता प्रभारी अश्विनी शुक्ला ने पुरस्कार ग्रहण किया। समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए।

PM2.5 और PM10 को नियंत्रित करने पर जोर

इंदौर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर काम किए गए। खास तौर पर हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे महीन कणों को नियंत्रित करने पर फोकस किया गया। शहर में सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले कण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे मुद्दों पर अलग-अलग स्तर पर काम किया गया।

सड़क की धूल पर लगाम लगाने की कोशिश

प्रमुख और व्यस्त सड़कों की सफाई के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया गया। धूल को दोबारा हवा में उड़ने से रोकने के लिए पानी के छिड़काव और सड़क किनारे पक्की सतह विकसित करने जैसे उपाय भी किए गए।

ग्रीन बेल्ट और पौधरोपण पर जोर

शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए डिवाइडर, पार्क और खाली स्थानों पर पौधरोपण किया गया। औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों के आसपास ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

निर्माण मलबे के प्रबंधन पर फोकस

निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के कारण होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों पर एंटी-डस्ट उपायों को लागू किया गया। मलबे को ढंककर प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।

कचरे से ईंधन और मलबे से निर्माण सामग्री

इंदौर में गीले कचरे से बायो-सीएनजी तैयार करने की व्यवस्था को भी स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन से जोड़ा गया है। वहीं निर्माण एवं विध्वंस मलबे को प्रोसेस कर पेवर ब्लॉक, ईंट और अन्य निर्माण सामग्री तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा

वायु प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-रिक्शा और ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ कचरा संग्रहण वाहनों को भी सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

स्वच्छता के बाद अब हवा की गुणवत्ता में भी पहचान

इंदौर की यह उपलब्धि इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि शहर ने स्वच्छता के साथ-साथ वायु गुणवत्ता सुधार को भी शहरी प्रबंधन की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में दूसरा स्थान मिलने के बाद अब शहर के सामने इस प्रदर्शन को बरकरार रखने और वायु गुणवत्ता में और सुधार करने की चुनौती भी होगी।

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