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नागदा में सड़क पर केमिकल टैंकर से रिसाव, 200 मीटर तक जलन की शिकायत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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नागदा। उज्जैन जिले के नागदा में ग्रेसिम स्टेपल फाइबर डिवीजन के पावर हाउस गेट के बाहर सोमवार दोपहर केमिकल से भरे टैंकर में रिसाव की घटना सामने आई। रिसाव के बाद आसपास के लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत होने की जानकारी सामने आई है। स्थिति को देखते हुए बिरला ग्राम मुख्य मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात रोकना पड़ा और पुलिस बल तैनात किया गया। टैंकर से रिस रहे केमिकल की पहचान को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। शुरुआती और अपुष्ट जानकारी में इसे एसिटिक एसिड बताया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

मुख्य मार्ग पर खड़े टैंकर से रिसाव

 जानकारी के मुताबिक, घटना सोमवार दोपहर करीब 12 बजे की है। टैंकर उद्योग परिसर में प्रवेश से पहले मुख्य मार्ग पर खड़ा था, इसी दौरान उसमें से केमिकल का रिसाव शुरू हो गया।रिसाव फैलने के बाद करीब 200 मीटर के दायरे में लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत हुई। इसके बाद एहतियातन सड़क पर यातायात रोक दिया गया। उद्योग के सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर टैंकर को मुख्य मार्ग से हटाया और उसे परिसर के अंदर ले जाया गया। इसके बाद रिसाव पर नियंत्रण पाने की कार्रवाई की गई।

नो-एंट्री के बावजूद टैंकर मुख्य मार्ग तक कैसे पहुंचा?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल भारी वाहनों की आवाजाही से जुड़े नियमों को लेकर उठ रहा है। यदि मुख्य मार्ग पर सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, तो घटना के वक्त केमिकल टैंकर उद्योग के गेट तक कैसे पहुंचा? क्या टैंकर को निर्धारित समय में प्रवेश की अनुमति मिली थी? यदि अनुमति थी तो किस आधार पर? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि रिसाव किसी अलग-थलग औद्योगिक क्षेत्र में नहीं, बल्कि मुख्य मार्ग के नजदीक हुआ। ऐसे में राहगीरों और आसपास के लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब जांच के दायरे में क्या-क्या?

घटना के बाद सिर्फ रिसाव की वजह ही नहीं, बल्कि टैंकर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी हो गई है। इसमें टैंकर की फिटनेस, टैंक और वाल्व की स्थिति, परिवहन अनुमति, चालक की सुरक्षा व्यवस्था, केमिकल की सही पहचान और रिसाव के कारण जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि टैंकर किस रास्ते से आया और क्या भारी वाहनों से संबंधित प्रतिबंधित समय के नियमों का पालन हुआ था।

प्रशासन से उठ रहे कई सवाल

ग्रेसिम की नागदा इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों और रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी हैं। ऐसे में किसी केमिकल टैंकर का मुख्य मार्ग पर रिसाव होना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता की जांच का आधार बन सकता है। अब प्रशासन के सामने कई सवाल हैं—टैंकर में वास्तव में कौन-सा केमिकल था? उसकी मात्रा कितनी थी? रिसाव किस वजह से हुआ? टैंकर मुख्य मार्ग तक कैसे पहुंचा? क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? और घटना के दौरान कितने लोग इसके संपर्क में आए? फिलहाल रिसाव पर नियंत्रण पाने की कार्रवाई की गई है, लेकिन मामले की पूरी तस्वीर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन घटना को केवल रिसाव रोकने तक सीमित रखता है या टैंकर के सड़क तक पहुंचने से लेकर रिसाव होने तक की पूरी प्रक्रिया की भी जांच करता है।

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