दो पदों के बाद रिकॉर्डिंग रोकने पर विपक्षी सदस्यों ने बाकी पद खुद गाए; विधान परिषद में भी हुआ विरोध
कर्नाटक विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन सोमवार को ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद हो गया। सदन की कार्यवाही की शुरुआत में वंदे मातरम की रिकॉर्डिंग चलाई गई, लेकिन इसे पहले दो पदों के बाद रोक दिया गया। इसके बाद भाजपा विधायकों ने विरोध जताते हुए गीत के बाकी पद खुद गाए।

विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने वंदे मातरम के शेष पदों का गायन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब राज्य में सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। दरअसल, कर्नाटक सरकार ने सितंबर में आदेश जारी कर सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो पद गाने की व्यवस्था की है। हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह सीमा लागू नहीं होगी और पूर्ण संस्करण के गायन का प्रावधान रखा गया है। वंदे मातरम को लेकर केंद्र और कर्नाटक सरकार के प्रोटोकॉल में अंतर भी इस विवाद का एक कारण है। केंद्र के जनवरी 2026 के निर्देश में राष्ट्रगान के साथ वंदे मातरम बजाए या गाए जाने की स्थिति में इसके सभी छह पदों के आधिकारिक संस्करण का उल्लेख किया गया था। वहीं, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को 1937 के अपने प्रस्ताव के अनुरूप पार्टी कार्यक्रमों में पहले दो पदों के गायन की स्थिति बनाए रखने का फैसला किया था।













