उमरिया। देश आजादी के दशकों बाद विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की बात कर रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश के उमरिया जिले का महोबादादर गांव अब भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का इंतजार कर रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में अब तक नियमित बिजली आपूर्ति नहीं पहुंची है, जिसके कारण रोजमर्रा की जिंदगी के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

शाम होते ही गांव में छा जाता है अंधेरा
महोबादादर गांव करकेली जनपद पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों के मुताबिक, सूरज ढलने के बाद गांव अंधेरे में डूब जाता है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए ढिबरी और लालटेन का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बुजुर्ग बिजली आने का इंतजार करते रहे, लेकिन उनके जीवनकाल में गांव तक बिजली नहीं पहुंच सकी। अब नई पीढ़ी भी इसी समस्या का सामना कर रही है।

मोबाइल चार्ज करने के लिए कई किलोमीटर का सफर
बिजली की कमी का असर सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी उन्हें करीब 5 से 6 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ऐसे में आपात स्थिति में संपर्क करना भी ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो सकता है।
जनसुनवाई में कलेक्टर से लगाई गुहार
गांव में बिजली पहुंचाने की मांग को लेकर ग्रामीण प्रशासन तक भी अपनी बात पहुंचा चुके हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, वे जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने समस्या रख चुके हैं और गांव में जल्द बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक स्थिति में बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
अब सवाल समाधान की पहल का
ग्रामीणों की समस्या सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर महोबादादर तक बिजली पहुंचाने में क्या बाधा है और इस काम के लिए जिम्मेदार विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। यदि ग्रामीणों का दावा सही है, तो बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित इस गांव के लिए प्रशासन को स्थिति का स्थलीय परीक्षण कर स्पष्ट समयसीमा के साथ समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। अब देखना होगा कि महोबादादर के ग्रामीणों का वर्षों पुराना इंतजार कब खत्म होता है और गांव में बिजली की रोशनी कब पहुंचती है।













