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इंदौर में कम बारिश से गर्मी में जल संकट की आशंका, महापौर ने मांगे 50 करोड़; नर्मदा लाइन फूटने से पानी बहा

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इंदौर। इस साल मानसून की बेरुखी ने इंदौर में अगली गर्मियों के लिए पेयजल व्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश वाले शहर में इस बार लगभग 23 इंच पानी बरसा। करीब 14 इंच की कमी के बीच महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है। कम बारिश का असर जलाशयों के भराव और भूजल स्तर पर भी पड़ने की आशंका है।

50 करोड़ के पैकेज से जल प्रबंधन मजबूत करने की तैयारी

महापौर ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की पेयजल जरूरतों को देखते हुए यशवंत सागर और बिलावली तालाब में पर्याप्त पानी जमा रखने का मुद्दा उठाया। इन जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के जरिए जल पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। कम बारिश को देखते हुए नगर निगम को उन इलाकों की पहचान करने की जरूरत है, जहां गर्मियों में पानी की कमी ज्यादा होती है। इसके लिए वार्डवार जल उपलब्धता, बोरवेल और हाइड्रेंट की स्थिति, टैंकरों की जरूरत तथा पुरानी पाइपलाइनों की जांच जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

नर्मदा पर निर्भरता, भूजल पर बढ़ता दबाव

इंदौर की पेयजल व्यवस्था का बड़ा हिस्सा नर्मदा नदी से मिलने वाले पानी पर निर्भर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शहर को नर्मदा से करीब 440 से 450 एमएलडी पानी मिलता है। इसके अलावा जिन इलाकों में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता, वहां बोरवेल और टैंकरों की भूमिका अहम हो जाती है।

कम बारिश के कारण तालाबों में पर्याप्त जल संग्रहण नहीं हो पाना और भूजल की सीमित उपलब्धता चुनौती बढ़ा सकती है। पिछले साल गर्मियों में भी बड़ी संख्या में बोरवेल सूखने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में आने वाले महीनों में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना नगर निगम के लिए अहम होगा।

जल संकट की आशंकाओं के बीच गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटने की खबर सामने आई। दी गई जानकारी के मुताबिक, पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी सड़क पर बहने लगा। पानी की ऊंची धार देखने के लिए राहगीर रुकने लगे, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। सड़क पर पानी जमा होने के कारण अंडरपास बंद होने की भी जानकारी है।

पाइपलाइन में लीकेज के कारण और मरम्मत की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही नुकसान और जलापूर्ति पर असर का सही आकलन हो सकेगा।

पानी बचाने की अपील के साथ व्यवस्था की परीक्षा

एक तरफ कम बारिश के कारण आने वाली गर्मियों के लिए जल संग्रहण बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ पाइपलाइन लीकेज जैसी घटनाएं जलापूर्ति नेटवर्क के रखरखाव पर सवाल खड़े करती हैं। शहर में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के साथ पाइपलाइन की नियमित निगरानी और लीकेज पर त्वरित कार्रवाई भी जरूरी होगी।

अब नजर इस बात पर है कि 50 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर सरकार क्या निर्णय लेती है और नगर निगम गर्मियों से पहले जल संकट की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए कितनी प्रभावी तैयारी कर पाता है।

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