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उज्जैन में उपद्रव से पहले 7 दिन चली सोशल मीडिया मुहिम, ‘JCB आ गई, जल्दी मस्जिद पहुंचें’ वाली रील की चर्चा

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शाही मस्जिद पर कार्रवाई की खबर फैलने के बाद जुटी भीड़, पथराव के मामलों में 8 FIR दर्ज; 20 लोगों को बनाया गया आरोपी

उज्जैन। शाही मस्जिद को हटाने की कार्रवाई से पहले उज्जैन में सोशल मीडिया पर कई दिनों तक मुहिम चलने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मस्जिद को बचाने की अपील करते हुए लगातार वीडियो और रील पोस्ट किए। एक वीडियो में कथित तौर पर कहा गया, “JCB आ गई, जल्दी मस्जिद पहुंचें।” इसके बाद सोमवार को कार्रवाई की खबर फैलने पर मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए।

Ujjain Shahi Masjid row: Why massive protest has erupted in the Mahakal temple city? - The Economic Times

रविवार रात से जुटने लगे थे लोग

जानकारी के अनुसार, रविवार रात से ही मस्जिद परिसर में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार सुबह करीब 8 बजे कार्रवाई की खबर फैलने के बाद भीड़ और बढ़ गई। इस दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई।

दूसरे शहरों से आए लोगों पर भी पुलिस की नजर

पुलिस के मुताबिक, देवास रोड पर दूसरे शहरों से आए पांच लोगों को पकड़ा गया। पुलिस को आशंका थी कि इन लोगों के आने से शहर की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उनके इरादों को लेकर पुलिस के आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

पथराव के मामलों में 8 FIR, 20 आरोपी

उपद्रव और पथराव की घटनाओं को लेकर महाकाल, खाराकुंवा और कोतवाली थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। इन मामलों में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, पथराव के मामलों में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सोशल मीडिया मुहिम की भूमिका की जांच जरूरी

बताया जा रहा है कि घटना से करीब एक सप्ताह पहले से कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मस्जिद को बचाने की अपील वाले वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हुई और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो भी वायरल हुआ।

अब इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो, लोगों को मौके पर बुलाने वाली अपीलों और उपद्रव के बीच संबंध की जांच अहम होगी। हालांकि, सोशल मीडिया पर मुहिम चलने भर से किसी पूर्व नियोजित साजिश की पुष्टि नहीं होती। यह स्पष्ट होना बाकी है कि वायरल वीडियो किसने बनाए, उनका उद्देश्य क्या था और क्या उनका पथराव की घटनाओं से कोई प्रत्यक्ष संबंध था।

फिलहाल पुलिस की जांच का केंद्र उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान, पथराव की घटनाओं और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की भूमिका पर रहेगा।

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