ग्वालियर/डबरा। मध्य प्रदेश के डबरा में शनिवार सुबह स्कूली बच्चों से भरी बस को रोककर फायरिंग की घटना से सनसनी फैल गई। टेकनपुर के ग्लोरीयस कॉन्वेंट स्कूल की बस को बड़ी अकबई गांव के पास कार सवार युवकों ने कथित तौर पर रोक लिया। विवाद बढ़ने के बाद बस पर चार राउंड फायरिंग की गई। घटना के वक्त बस में करीब 50 बच्चे सवार थे। फायरिंग में बस चालक खेम सिंह घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया है। राहत की बात यह रही कि किसी बच्चे को गोली नहीं लगी।

सड़क पर खड़ी कार हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, बस सुबह बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। बड़ी अकबई गांव के पास सड़क पर एक स्विफ्ट कार खड़ी थी। कार पर ‘गुर्जर’ लिखा होने और उसके शीशे काले होने की बात सामने आई है। बस चालक ने रास्ता देने के लिए हॉर्न बजाया। आरोप है कि कार सवार युवकों ने पेट्रोल खत्म होने की बात कही। चालक ने कार को धक्का देकर सड़क से हटाने की बात कही, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान कथित तौर पर एक युवक ने अवैध कट्टा निकाल लिया और बस की ओर चार राउंड फायरिंग कर दी।
गोलियों की आवाज से सहमे बच्चे
फायरिंग की आवाज सुनकर बस में बैठे बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान चालक के घायल होने के बाद बच्चों में दहशत फैल गई और कई बच्चे घबरा गए। बस के शीशे पर भी गोली लगने के निशान मिलने की बात सामने आई है। अगर इनमें से कोई गोली बच्चों को लगती तो हादसा और गंभीर हो सकता था।
पुलिस ने शुरू की आरोपियों की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही SDOP सौरभ कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि कार और उसमें सवार आरोपियों की पहचान की जा सके। घटना में इस्तेमाल हथियार और आरोपियों की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
स्कूल बस में करीब 50 बच्चे सवार हों और बीच सड़क पर उस पर फायरिंग हो जाए—यह घटना कानून-व्यवस्था के साथ-साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि आखिर आरोपियों में कानून का डर इतना कम कैसे हुआ कि बच्चों से भरी बस को रोककर हथियार लहराने और फायरिंग करने की नौबत आ गई? अब पुलिस के सामने सिर्फ आरोपियों को पकड़ने की चुनौती नहीं है। चुनौती यह भरोसा कायम करने की भी है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की राह में दबंगई और हथियार नहीं, कानून का राज चलेगा।













