नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने से हुई 7 लोगों की मौत के बाद अब अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने MCD को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अवैध इमारतों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहें।

सभी PG और हॉस्टलों की होगी जांच
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में चल रहे PG और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी PG हॉस्टलों की गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को बिल्डिंग के रिकॉर्ड खंगालने और यह पता लगाने को कहा गया है कि संबंधित इमारत में अवैध निर्माण कब हुआ। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि निर्माण की अनुमति और निगरानी की जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी की थी। MCD ने हादसे के बाद अब तक 24 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की है, जबकि 7 अवैध ढांचों को सील किया जा चुका है।
PG मालिक समेत 5 लोग गिरफ्तार
सत्य निकेतन PG हादसे के मामले में बुधवार तक 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने बुधवार को सुधांशु नाम के युवक को गिरफ्तार किया, जो हॉस्टल डेज नाम से PG चला रहा था। उसका पार्टनर शुभम त्यागी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। दोनों ने अगस्त 2025 में यह बिल्डिंग लीज पर ली थी।] इससे पहले पुलिस बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को गिरफ्तार कर चुकी है। हरिराम बंसल एयरफोर्स के रिटायर्ड सार्जेंट बताए जा रहे हैं। सोमवार रात हरिराम, उर्मिला और महेश को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत मिली।
बेसमेंट की मरम्मत के दौरान मशीन चलने से बढ़ा खतरा?
पुलिस पूछताछ में महेश ने कथित तौर पर बताया कि PG संचालक कंपनी की शिकायत के बाद बेसमेंट में जमा पानी और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन का इस्तेमाल किया गया। मशीन से पैदा हुए कंपन और पहले से कमजोर संरचना के बीच संभावित संबंध की जांच की जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पड़ोसी गर्ल्स PG की दीवारों में भी दिखीं दरारें
हादसे के बाद सत्य निकेतन की दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कनक लता गर्ल्स PG को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। इस PG में रहने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राओं ने अपने कमरों की दीवारों और छत में आई दरारों का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। दावा है कि सत्य निकेतन की दूसरी PG बिल्डिंग गिरने से कुछ मिनट पहले ही छात्राओं ने यह वीडियो बनाया था। वीडियो में एक छात्रा को इमारत की हालत देखकर चिंता जाहिर करते हुए सुना जा सकता है। इसके बाद सामने आए घटनाक्रम ने इलाके में रहने वाले छात्रों और PG संचालकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान, 10 सितंबर को सुनवाई
सत्य निकेतन हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि अदालत इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा कर सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने 6 सितंबर की सत्य निकेतन दुर्घटना का उल्लेख किया। यह मामला अवैध और असुरक्षित भवनों से जुड़े पुराने मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
300 मकान, करीब 170 में चल रहे PG
सत्य निकेतन की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इलाके के इतिहास और यहां तेजी से बढ़े PG कारोबार को भी देखना जरूरी है। बताया जाता है कि सत्य निकेतन इलाके को 1965-70 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। 1970 के दशक में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के शुरू होने के बाद यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गई। इलाके में करीब 300 मकान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG संचालित होने की जानकारी सामने आई है। कई मूल आवंटियों द्वारा मकान बेच दिए जाने के बाद यहां किराये और PG व्यवस्था का विस्तार हुआ। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक, दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के लिहाज से तैयार नहीं हैं। उनका दावा है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे मकान हैं, जिनके स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान उपलब्ध नहीं हैं।
MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद MCD ने भी अपने स्तर पर कार्रवाई की है। साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को सोमवार को सस्पेंड किया गया। उनके साथ चार इंजीनियरिंग अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 2016 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी सौरभ फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।
अब सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण, कमजोर पुरानी इमारतों और बढ़ते PG कारोबार की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब MCD की कार्रवाई कितनी व्यापक होती है और जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है, इस पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और दिल्ली सरकार की कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्य निकेतन हादसा केवल एक इमारत तक सीमित मामला रहेगा, या दिल्ली की दूसरी जर्जर और अवैध इमारतों पर भी व्यापक कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।













